Ads 468x60px

Pages

Wednesday, May 18, 2011

उसके प्यार का इंकार


वो कहती है बड़ी शोखियों से
की उसे मुझसे प्यार नहीं है
मै पूंछता हूँ जो उससे तकती हो
हर रोज किसकी राह खिडकी पर
तो अदाओं से कहती है
उसे मेरा इन्तेजार नहीं है

सब कहते हैं मुझे दीवाना उसका
जो उसके हर इंकार को भी
मेरे दिल की हर धडकन
बस इकरार समझती है

अब कैसे बताऊँ मै लोगो को
ये उनकी नजरे ही तो है
जिनसे बचने के लिए वो
प्यार के इजहार से इंकार करती है

चाहे कितना भी इंकार वो कर ले लेकिन
उसकी आँखों मे पढ़ा है मैंने
एक मै ही हूँ वो शख्स दुनिया मे
जिससे टूट कर के वो प्यार करती है

4 comments:

सुरेन्द्र सिंह " झंझट " said...

प्रेम रस भरी ...प्यारी रचना
आमीन ...

वन्दना said...

बहुत सुन्दर भावाव्यक्ति।

संजय भास्कर said...

कुछ तो है इस कविता में, जो मन को छू गयी।

(कुंदन) said...

जी धन्यवाद पसंद करने के लिए

Post a Comment

 
Google Analytics Alternative