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Sunday, April 24, 2016

जन्नत का दीदार हुआ |

तूने जो छुआ होठो से, जन्नत का दीदार हुआ |
चाहा तुझे ना चाहे, पर फिर भी दिल बेक़रार हुआ|

कोशिश बहुत की हमने, अरमानो को दिल में दबाने की
पहले दबे पल भर को, फिर अरमानो का यलगार हुआ |

शिकायते हमारी तो, कम न थी नसीब से हो
पर तेरे छूने से, खुद की खुशनसीबी पर ऐतबार हुआ |


चाहां भी की दिल का हाल तुझे बता दे हम
पर डरते रहे, क्या होगा जो तेरा इनकार हुआ |


ज्यादा चाहते नहीं है, पर सारी खुशियाँ मेरी हो जाये
जो तू कह दे, "कुंदन" मुझ को भी तुझ से प्यार हुआ |

Thursday, April 21, 2016

वो सूखा दवात नहीं देखा ....


तुमने अपने दिल की कह दी पर मेरे अनकहे जज्बातों को नहीं देखा
मुझ पर इल्जाम लगा दिया पर मेरे उन बुरे हालातों को नहीं देखा
तुमने देख लिया उस सफ़ेद कागज पर लिखे सारे लाल अल्फाजों को 

पर दर्द ये है की तुमने कोने में पड़ा वो सूखा हुआ दवात नहीं देखा  
 
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