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Monday, October 3, 2011

सब कुछ तो तुमने दे दिया

सब कुछ तो तुमने दे दिया,
मुझको एक आलिंगन में
चाहूँ भी तो मै क्या चाहूँ
कमी बची ही कहाँ जीवन में

उस आलिंगन से
दो बाँहों की परिधि में आकार
मुझको सारा संसार मिल गया
जग को खोने का तुमको पाने का
मुझको सारा अधिकार मिल गया,
एक उजियारा फ़ैल गया
मेरे मन के अंधियारे आंगन मे

चाहूँ भी तो मै क्या चाहूँ
कमी बची ही कहाँ जीवन मे
सब कुछ तो तुमने दे दिया,
मुझको एक आलिंगन मे

उस आलिंगन से
क्षोभ मिट गया, क्लेश मिट गया
मन की सारी तृष्णा मिट गई
कुछ कलुषिता मन में भरी हुई थी
वो सारी वितृष्णा मिट गई
भागीरथी अवतरित हो गई
मेरे पापी से इस मन में

चाहूँ भी तो मै क्या चाहूँ
कमी बची ही कहाँ जीवन मे
सब कुछ तो तुमने दे दिया,
मुझको एक आलिंगन मे

अब बस प्रेम की वर्षा होती है
तन मन मेरा भीगता जाता है
इस प्रेम की अमृत वर्षा में
मन प्रेम की अमर गीत गाता है
प्रेम संगीत बरसता है ऐसे
जैसे लगी झड़ी हो सावन में

चाहूँ भी तो मै क्या चाहूँ
कमी बची ही कहाँ जीवन मे
सब कुछ तो तुमने दे दिया,
मुझको एक आलिंगन मे

1 comments:

वन्दना said...

बहुत सुन्दर भाव समन्वय्।

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