Ads 468x60px

Pages

Sunday, May 22, 2011

भ्रस्टाचार से खुद ही लड़ना होगा


आज देश मे हर शख्स
इमानदारी की डफली बजा रहा है
देश को भ्रस्टाचार से मुक्त करो
यही एक राग गा रहा है

कोई नेताओं को भ्रष्टाचारी बताता है
कोई सिस्टम को दोषी ठहरता है

पर जाने क्यों कोई भी शख्स
खुद के अंदर है जो भ्रष्टाचारी
उस पर कोई प्रश्नचिन्ह नहीं लगाता है

कभी हम गैस की टंकी
कुछ ज्यादा पैसे दे कर ले लेते हैं
कभी अपने अधिकारों का हनन
चुप कर के सह लेते हैं

कभी भगवान के दर्शन भी
कुछ पैसे दे कर जल्दी कर आते हैं

और कभी टैक्स के थोड़े पैसे बचाने को
पूरे पैसे का बिल नहीं बनवाते हैं

और उस पूरे पैसे को
व्यापारी की काली कमाई मे पहुंचाते हैं

हम खुद ईमानदार नहीं है
लेकिन नेताओं से इमानदारी की उम्मीद लगाते हैं

आप खुद ही बताइये क्या सच मे
आप भ्रष्टाचार को जड़ से मिटाना चाहते हैं

जो आपका जवाब हाँ है तो खुद से भी लड़ना होगा
खुद के अंदर है जो भ्रष्टाचारी उसे समाप्त करना होगा

किसी और के घर मे भगत सिंह के आने का
इन्तेजार अब बंद करना होगा

जब तक हम दूसरों के घरों मे
भगत सिंह के होने की दुआएं मनाएंगे
तब तक हम भ्रस्टाचार की अंधी मे
सिर्फ सूखे दरख्तों की तरह टूटते ही जायेंगे

गाँधी, नेहरु, सुभाष, तिलक और भगत सिंह
फिर से अब हमारे लिए लड़ने को नहीं आयेंगे

उनके बनाए रास्तो पर चल कर
खुद ही भ्रष्टाचार से अब हमें लड़ना होगा 

हर कतरे पर फैले भ्रस्टाचार का
प्रतिकार हमें ही करना होगा


मै ये नहीं कहता की
कोई बदलाव एक दिन मे आ जायेगा
६४ सालो की गंदगी को धुलने मे
थोडा वक्त तो लग ही जायेगा

और हम जो आज पहला कदम बढ़ाएंगे
तभी कल एक अच्छा भारत बना पाएंगे
***************************

उम्मीद है आप मेरी राय से इत्तेफाक रखते हैं और इस विषय मे कुछ न कुछ जरूर करेंगे



2 comments:

sks_the_warrior said...

आपने भ्रष्टाचार के खिलाफ बहुत कुछ सोचा है .. और सही कहा..कि हमें खुद ही लड़ना होगा.. हमें खुद ही लड़ना होगा ...जाने क्यू बेचैनी झलक सी रही है आपकी रचना में.. शायद यह पीड़ा का ही एक रूप है

संजय भास्कर said...

सोचने को मजबूर करती है आपकी यह रचना ! सादर !

Post a Comment

 
Google Analytics Alternative