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Tuesday, January 10, 2012

जाने क्या कड़वाहट है सियासत में

जाने क्या कड़वाहट है सियासत लफ्ज में
एक दोस्त को दोस्त से दुश्मन बना देती है ये

जो साथ बैठ कर चूसते थे गन्ने खेतों में
उनमे ही आपस में कड़वे बोल बुलवा देती है ये

कभी जिन्होंने एक दुसरे को अलग न समझा
उन्ही को हिंदू और मुसलमान बना देती है ये

मजहब सिखाता है अमन चैन से रहना
मजहब के नाम पर नफरत सिखा देती है ये

ईद और दीवाली पर जिन्हें कहते हें भाई हम
उन्ही भाइयों से वोटों के लिए लडवा देती है ये

जाने क्या कड़वाहट है सियासत लफ्ज में
एक दोस्त को दोस्त से दुश्मन बना देती है ये



2 comments:

संगीता स्वरुप ( गीत ) said...

सार्थक विश्लेषण किया है सियासत शब्द का ..

संजय भास्कर said...

वाह बेहतरीन !!!!

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