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Monday, August 29, 2011

तुम्हारी वो तोहफे की शिकायत

 
वो तोहफा
जो तुमने कभी माँगा था,
आज भी,
वैसे ही सहेज कर रखा हुआ है.
मै कभी भी
उसे तुम तक पहुंचा नहीं पाया

मेरे दिल मे
काफी कुछ था तुम्हे बताने को
कभी भी
वो तुम्हे बता भी नहीं पाया

तुम्हारी शिकायत रही
मैने तुम्हे वो तोहफा नहीं दिया
पर यहाँ भी
नुक्सान तो मैने ही उठाया

उस तोहफे मे
याद बन कर तुम्हारे साथ रहता
देखो मेरी किस्मत
सच में तो तुम्हारे साथ मै रह न सका
यादों मे भी
मै तुम्हारे साथ रह ना पाया

2 comments:

संजय भास्कर said...

एक साथ कई भावों को संजोये बहुत ही सुंदर रचना..

वन्दना said...

सुन्दर भाव्।

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