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Monday, May 16, 2011

अभी अभी जन्मी बेटी का परिवार से मासूम सवाल

एक बेटी जब जन्म लेती है तो उसके बाद कई घरों में लोगो का हाव भाव बड़ा ही अजीब हो जाता है ऐसे समय में अगर वो बेटी अपने परिवार से सवाल कर सकती तो उसके सवाल शायद ऐसे ही कुछ होते
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मै बस अभी अभी इस दुनिया में आई हूँ
पर फिर भी आप सब मुझ से नाराज क्यूँ है..

भगवान जी ने मुझे यहाँ भेंजने के पहला कहा था
मेरे पहले रोने पर सभी खुशिया मनायेंगे
लेकिन यहाँ सभी इतने उदास क्यूँ है

माँ... भगवान जी ने मुझे यहाँ भेजते समय कहा था
की वहा मुझे दुसरे भगवान जी मिलेंगे जिसे मै माँ कहूँगी

मैंने उनसे पूंछा था की मै माँ को पहचानूंगी कैसे
तो वो बोले थे की माँ की आँखों में आंसू और चेहरे पर ढेर सारी खुशी होगी
तुम्हारी आँखों आंसू तो है पर चेहरे पर खुशी क्यों नहीं है
भगवान जी ने मुझ से कहा था
तुमने मुझे ९ महीने सब से बचा कर अपने पेट में रखा था
बहुत सारी तकलीफे उठाई थी
अब जब मै ठीक हूँ तो क्या तुम्हे खुशी नहीं हो रही है

भगवान जी ने ये भी बताया था की जब भैया आया था
तो दादा जी ने उसे उनका नया जन्म कहा था
तो फिर दादी जी आप मेरे होने पर क्यों कह रही हो
मै कुल को खत्म करने के लिए आई हूँ
क्या मै आपका नया जन्म नहीं हो सकती

चाचा, चाची, ताऊ, ताई आप लोग क्यूँ नाराज हो मुझ से
मैंने तो ना आपसे कुछ माँगा है और ना कोई उम्मीद है
फिर भी आप मेरे होने पर दुखी ही है

पापा क्या मै इतनी बुरी हूँ
की सब मेरे आने से इतना दुखी हो गए, रोने लगे.
भगवान जी ने मुझ से कहा था की मै जहा जा रही हूँ
वहाँ मुझे मेरे पापा मिलेंगे
जो मुझे सबसे ज्यादा प्यार करेंगे
भगवान जी से भी ज्यादा
वो मुझे कभी रोने नहीं देंगे,
कोई मुझे कुछ बोलेगा तो पापा उसको डांटेंगे
मै जो मांगूंगी वो मुझे ला कर देंगे
मेरा हमेशा ध्यान रखेंगे,
कोई गलती करूंगी तो भी गुस्सा नहीं होंगे

लेकिन पापा मैंने तो कोई गलती नहीं की
मैंने तो कुछ माँगा भी नहीं
फिर भी आप मुझ से क्यों गुस्सा हो

ये सब लोग मुझे गन्दा गन्दा बोल रहे है
तो आप इनको डांट क्यूँ नहीं लगाते

आप मेरे आने पर मिठाई भी नहीं बाँट रहे और खुश भी नहीं हो
लेकिन फिर भी मै आपको सबसे ज्यादा प्यार करूंगी
और हमेशा करती रहूंगी
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ये सवाल सभी पर लागू नहीं होते कुछ ऐसे लोग भी है जिनके लिए बेटी का होना परिवार का सम्पूर्ण होना होता है
उम्मीद है मैंने किसी का दिल नहीं दुखाया होगा अगर ऐसा हुआ
है तो क्षमा चाहूँगा

3 comments:

सुरेन्द्र सिंह " झंझट " said...

नवजात बिटिया के सवालों के माध्यम से आपकी कविता एक बहुत बड़ा सवाल इस समाज से कर रही है ....

हर परिवार में तो नहीं किन्तु बहुत से परिवारों में आज भी बेटी के जन्म पर दुःख मनाया जाता है जबकि बेटी किसी भी मायने में बेटे से कम नहीं ......



मर्मश्पर्सी रचना......

वन्दना said...

झकझोरने वाले प्रश्न हैं मगर जवाब देने वाले नहि मिलेंगे।

(कुंदन) said...

सुरेन्द्र सिंह जी बिलकुल सही कह रहे हैं आप

ये कविता मैंने कुछ २ महीने पहले लिखी थी एक सच्ची घटना से दुखी हो कर.....

वंदना जी जवाब तो ढूँढने ही होंगे कही न कही से

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