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Sunday, May 8, 2011

माँ मै तो अब भी तेरा वही छोटा बच्चा हूँ

लोग कहते हैं मै बड़ा हो चूका हूँ पर

माँ मै तो अब भी तेरा वही छोटा बच्चा हूँ
मै आज भी अँधेरे में
तेरे साथ ना होने से डर जाता हूँ

मै आज भी तेरे हाथो से नहीं खाने पर
कभी कभी भूखा ही रह जाता हूँ 

मै अब भी दिन भर की थकन से
कभी कभी बिना जूते उतारे ही सो जाता हूँ

मै आज भी कभी कभी लड़ कर के
घर आता हूँ और तुझे नहीं बताता हूँ

माँ मै तो अब भी तेरा वही छोटा बच्चा हूँ

मै आज भी अँधेरे में
तेरे साथ ना होने से डर जाता हूँ

मै आज भी तेरे हाथ से बनी दाल में
५६ भोग से ज्यादा रस पाता हूँ

मै आज भी तेरे आँचल की छाँव में
ब्रहमांड का हर सुख पाता हूँ

मै आज भी तेरी ही गोद में
सबसे ज्यादा चैन की नीद सो पाता हूँ


माँ मै तो अब भी तेरा वही छोटा बच्चा हूँ
मै आज भी अँधेरे में
तेरे साथ ना होने से डर जाता हूँ

मै आज भी तुझ से डाट खाने को
यू ही शैतानी कर जाता हूँ

मै आज भी तुझ से लोरी सुनने को
कभी कभी रातो को जग जाता हूँ


माँ मै तो अब भी तेरा वही छोटा बच्चा हूँ
मै आज भी अँधेरे में
तेरे साथ ना होने से डर जाता हूँ

8 comments:

संगीता स्वरुप ( गीत ) said...

खूबसूरत अभिव्यक्ति

सुरेन्द्र सिंह " झंझट " said...

ह्रदय की रचना .....आँखें नम कर गयी

वन्दना said...

आपकी रचनात्मक ,खूबसूरत और भावमयी
प्रस्तुति भी कल के चर्चा मंच का आकर्षण बनी है
कल (9-5-2011) के चर्चा मंच पर अपनी पोस्ट
देखियेगा और अपने विचारों से चर्चामंच पर आकर
अवगत कराइयेगा और हमारा हौसला बढाइयेगा।

http://charchamanch.blogspot.com/

udaya veer singh said...

mohak srijan --
मै आज भी तेरे आँचल की छाँव में
ब्रहमांड का हर सुख पाता हूँ
matchless love of mother .
shukriya ,ji .

डॉ॰ मोनिका शर्मा said...

माँ मै तो अब भी तेरा वही छोटा बच्चा हूँ
मै आज भी अँधेरे में
तेरे साथ ना होने से डर जाता हूँ

हृदयस्पर्शी..... बहुत सुंदर भाव संजोये आपने.....

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक (उच्चारण) said...

माँ को प्रणाम!
मातृदिवस पर बहुत सुन्दर रचना लिखी है आपने!
--
बहुत चाव से दूध पिलाती,
बिन मेरे वो रह नहीं पाती,
सीधी सच्ची मेरी माता,
सबसे अच्छी मेरी माता,
ममता से वो मुझे बुलाती,
करती सबसे न्यारी बातें।
खुश होकर करती है अम्मा,
मुझसे कितनी सारी बातें।।
--
http://nicenice-nice.blogspot.com/2011/05/blog-post_08.html

(कुंदन) said...

आपके स्नेह का लाखो लाख धन्यवाद

आपका स्नेह और प्रेम ही है जो बुरे को भी अच्छा बना देता है और ये तो माँ का स्नेह और प्रेम था तो अच्छा हो गया :) आप सभी का ढेरो धन्यवाद मेरी हौसला अफजाई के लिए और पसंद करने के लिए

अविनाश मिश्र said...

मै आज भी तेरे आँचल की छाँव में
ब्रहमांड का हर सुख पाता हूँ
bahut hi sundar ....
dil moh liya aapki kavita ne...
dhanywad...

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