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Saturday, May 14, 2011

एक बच्चे की चाहत

कल एक फोटो क्लिक करा मोबाईल से ओर आज जब कंप्यूटर पर कॉपी करा तो अपने आप ही एक कविता बन गई ... शायद बच्चो की यही चाहत होती हो

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पापा

मुझे लालसा नहीं है
किसी महंगे खिलौने की

मेरी चाहत नहीं है
डिज्नी वर्ल्ड मे खोने की

मेरी इच्छा तो है बस
आपके सीने पर सर रख कर कुछ देर सोने की


मुझे भूख नहीं है
किसी भी पकवान को खाने की

मेरी मांग नहीं है
चोकलेट आइसक्रीम दिलवाने की

मेरी इच्छा तो है बस
मेरे खाते हुए सदा ही आपको सामने पाने की

मुझे आकांक्षा नहीं है
किसी महंगी ड्रेस के मेरे पास होने की

मुझे लालसा नहीं है
कई लोगो मे से अलग ओर खास होने की

मेरी इच्छा तो है बस
आपके साथ कुछ देर खेल मे गुम होने की


मेरी इच्छा तो है बस
आपके सीने पर सर रख कर सोने की

3 comments:

वन्दना said...

वाह बहुत ही मासूम सी इच्छा है……बच्चे के भावो को सुन्दर शब्द दिये हैं।

artijha said...

पापा

मुझे लालसा नहीं है
किसी महंगे खिलौने की

मेरी चाहत नहीं है
डिज्नी वर्ल्ड मे खोने की

मेरी इच्छा तो है बस
आपके सीने पर सर रख कर कुछ देर सोने की


मुझे भूख नहीं है
किसी भी पकवान को खाने की

मेरी मांग नहीं है
चोकलेट आइसक्रीम दिलवाने की

मेरी इच्छा तो है बस
मेरे खाते हुए सदा ही आपको सामने पाने की

मुझे आकांक्षा नहीं है
किसी महंगी ड्रेस के मेरे पास होने की

मुझे लालसा नहीं है
कई लोगो मे से अलग ओर खास होने की

मेरी इच्छा तो है बस
आपके साथ कुछ देर खेल मे गुम होने की


मेरी इच्छा तो है बस
आपके सीने पर सर रख कर सोने की.........ek ek sabd khubsurt...ek ek bhaaw dil ko chhuti hui...or ek ek line papa or bacche ko masum banti hui....bhut achhi rachna...no words to....speechless....

(कुंदन) said...

धन्यवाद वंदना जी

धन्यवाद अर्थजा जी

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